Dr Pallavi Mishra is working as an Associate Professor. NET/JRF qualified.Founder of PAcademi.com

My photo
This is Dr Pallavi Mishra, working as an Associate Professor

Sunday, May 15, 2016

भारत के गावों की तस्वीर दिखाता रूरल टूरिज्म


भारत का दिल उसके गांवों में बस्ता है, गौरतलब है कि 2011 के जनगणना के अनुसार आज भी भारत की लगभग 70 प्रतिशत आबादी गांवो में निवास करती है | इन आकड़ों ने साफ़ कर दिया है कि देश की आधी से ज्यादी आबादी की आजीविका का प्रमुख साधन खेत से होकर निकलता है | राष्ट्रीय आय में लगभग एक तिहाई योगदान ग्रामीण भारत से आता है | उल्लेखनीय है भारत का शहर और गाँव दोनों ही प्रकृति के सौन्दर्यता से लबरेज़ है | अतुल्य भारत की खूबसूरत तस्वीर को सिर्फ शहरी पर्यटन से ही नहीं बल्कि ग्रामीण पर्यटन से भी अनुभव किया जा सकता है | भारत में पर्यटन तीसरा सबसे बड़ा निवल विदेशी मुद्रा का अर्जक है जिसका राष्ट्रीय सकल घरेलू उत्पाद में 6.23% और भारत के कुल रोज़गार में 8.78% योगदान है | यह राष्‍ट्र की विकास योजना के सामाजिक आर्थिक लक्ष्‍य को हासिल करने में मुख्‍य भूमिका निभाता है | बरहाल अब ग्रामीण भारत में बरसों से छिपे ग्रामीण पर्यटन के महत्व को पहचाना जा रहा है जो देश के लिए कई अर्थों में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है और इससे विश्‍व पर्यटन बाजार में भारत को अलग पहचान मिल सकती है | ग्रामीण पर्यटन भारत के गांवों की वास्तविक संस्कृति से रूबरू होने के अवसर देगा जिससे यहाँ के पुरातात्विक कलाकृतियों के बेजोड़ संगम को अनुभव किया जा सकता है | केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय द्वारा ग्रामीण पर्यटन की परियोजनाओ के विकास पर विशेष जोर दिया जा रहा है | हाल के वर्षों में भारत में ग्रामीण पर्यटन को प्रोत्साहित कर कई भारतीय गांवों को पर्यटन के नक्शे पर स्थान मिला है | 
 ग्रामीण क्षेत्रों का भ्रमण करने पर यहां शहरी चमक-दमक तो नहीं पर शांति और अनुकूलता का अनुपम संगम देखने को मिलता है | भारत के गांव हमेशा अपनी कला के माध्यम से जाने जाते है, इसके ग्रामीण क्षेत्रों में विरासत, कला एवं संस्‍कृति, धार्मिक एवं आध्‍यात्मिक पर्यटन, साहसिक एवं प्राकृतिक पर्यटन तथा परंपरागत पर्यटन आदि के भरपूर अवसर मिलते हैं | ग्रामीण पर्यटन को संगठित कर विदेशी एवं घरेलू आगंतुकों को आकर्षित किया जा सकता है | ग्रामीण पर्यटन के द्वारा भारत के गावों में बसी लोकगीत और लोक नृत्य की कला को भी अलग अन्तराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल सकती है | पिछले कुछ वर्षों में पर्यटकों का रुझान ग्रामीण पर्यटन की तरफ बढ़ा है | इस कारण ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यटन विकास को लेकर कई योजनायें  प्रस्तावित हुई है | यहां की संस्कृति,लोक गीत स्थानीय नृत्य मेलों और त्योहारों को ध्यान में रखते हुए, ग्रामीण पर्यटन की परियोजनाओं की रचना की जा रही है | पर्यटन विभाग ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यटकों की सुविधा हेतु कई योजनाओं पर कार्यरत है जिसमें पेइंग गेस्ट हाउस तथा फार्म हाउस प्रमुख है |
कुम्बलंगी एकीकृत पर्यटन गाँव परियोजना की स्थापना के बाद से गांव के पर्यटन और समुद्री गतिविधियों को बहुत प्रोत्साहन मिला है | यह भारत की पहली परियोजना थी जिसका उद्देश्य कुम्बलंगी को एक आदर्श मछली पकड़ने वाले गाँव और पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित किया गया | पर्यटक यहाँ की सैर कर मनोरम दृश्यों का आनंद लेते हैं और साथ ही साथ नौका सवारी का अविस्मरणीय अनुभव प्राप्त करते है |आगंतुक इस द्वीप पर की जाने वाली मत्स्य पालन, नारियल की जटा की कताई और अन्य कई समुद्री गतिविधियों का आनंद लेते है | इस परियोजना के एक भाग में बैकवॉटर टूर्स (जिसमें दिन में नाव की सवारी और पूरी रात नाव की सवारी के पैकेज आते हैं) और सांस्कृतिक कार्यक्रमों  का आयोजन किया जाता हैं |
ग्रामीण पर्यटन का प्रोत्साहन करने हेतु हिमाचल में, पर्यटकों को वहाँ की संस्कृति और जीवन शैली से रूबरू कराने तथा घर जैसा माहौल उपलब्ध कारने के लिए प्रदेश सरकार ने “होम स्टे” नाम की योजना शुरू की है | ऐसे ही हरियाणा ने भी ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए फार्म हाउस टूरिज्म को विकसित करने की पहल की है ताकि देशी और विदेशी पर्यटक राज्य की ग्रामीण जीवन शैली, रीतिरिवाजों और खेतखलिहानों की झलक पाकर देश के अनूठे रंग से वाकिफ हो सकें। हरियाणा पर्यटन निगम नेफार्म हॉलिडेऔर विलेज सफारीपर्यटन की योजनाएं शुरू की है | म्हारा गांवनाम की योजना से पर्यटकों को हरियाणा के लोक संस्कृति से जोड़ने की बेहतरीन कोशिश की जा रही है | सूरजकुंड में हर साल होने वाला मेला देशीविदेशी पर्यटकों को ग्रामीण परिवेश की ओर आकर्षित कर रहा है |
रूरल टूरिज्म की ओर पर्यटकों का रुझान देखते हुए केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय अब विलेज दूरिज्म की संभावनाओं को तलाश रहा है | इस कड़ी में पर्यटन विभाग कुछ चुनिंदा गांवों को विलेज टूरिज्म की तर्ज पर बढ़ावा देने का प्रयास कर रहा है ताकि रूरल टूरिज्म द्वारा विदेशी व देशी पर्यटकों को गांवों की संस्कृति से जोड़ा जा सके | विलेज टूरिज्म का उचित कार्यान्वयन देश के लिए कई अर्थों में एक बेहतर विकल्प साबित हो सकता है |  
हाल के वर्षों में भारत के ग्रामीण पर्यटन बाजार में हुए विकास से कई भारतीय गांवों को पर्यटन के नक्शे पर जगह मिली है | इतना ही नहीं यह आय का एक बहुत आवश्यक अतिरिक्त स्रोत है जो ग्रामीणों को आय का एक नया स्त्रोत प्रदान करने के साथ साथ गाव वासियों को आगंतुकों के साथ बातचीत कर नयी जानकारी हासिल करने के भी अवसर प्राप्त कराएगी |

Sunday, May 8, 2016

मोहब्बत का दरिया “माँ”

लम्हा लम्हा हर पल गुजरा..
जिसके आँचल में बचपन गुजरा ..
सवांरने में हमारी ज़िन्दगी जिसके ज़िन्दगी का सफ़र गुजरा..
रात रात भर जाग जाग कर नींदों का कारवां चला  ..
जिसके ख्वाबों में भी मेरा ही चेहरा रहा ..
जिसके सुबह शुरू होती मुझसे ..
जिसके शाम में भी मैं ही थी शामिल ...
वो हसाती भी है मेरे दर्द में डूब जाती भी है ...
भर गयी जो अश्कों से आखें मेरी ..
उसकी आखें भी नम हो जाती  ..
एक “माँ” ही तो है जो पास रहकर ...
और दूर होकर भी हर पल साथ निभाती है   ...
वो साथ हो या ना हो अपने होने के एहसास कराती है ...
जब कभी ज़िन्दगी से चोट मिली ..
लब पर तेरा ही नाम आया ..
तेरे ही हौसलों से बुने मैंने ख्वाब मेरे ..
तेरे ही इरादों ने दी पंखों को उड़ान मेरे ..
जब कभी लड़खादाएं कदम..
तूने संभाल लिया ..   
मेरे हर गम को अपने दामन में थाम कर ..
मेरी फिक्र को भी अपना ही नाम दिया  ..
“माँ” एक शब्द नहीं, एक पूरा “जहां” है..
जिसकी ममता से सींचता एक ज़िन्दगी का फलसफा है ...



Monday, May 2, 2016

प्रवासी मजदूरों की दयनीय दशा


उल्लेखनीय है कि हाल ही में भारत सरकार द्वारा प्रस्तुत किये गए आज़ाद भारत की आर्थिक, सामाजिक और जाति आधारित जनगणना ने साफ़ कर दिया है कि आज़ादी के 67 साल बाद भी भारत में मजदूरों की दशा में बहुत ज्यादा सुधार नहीं हो पाया है | ये जनगणना भारतीय समाज के मजदूरों की दशा को आईना दिखाते हुए स्पष्ट कर रहा है कि  भारत में मजदूरों की माली हालत ठीक नहीं है | उनकी मासिक आय बहुत कम है और इसका एक मूल कारण ये है कि यहाँ मजदूरों की दिशा असंगठित है | भारत में मजदूरों की दशा विचारणीय है लेकिन प्रवासी भारतीय मजदूरों की स्थिति यहाँ के मजदूरों की तुलना में बहुत अधिक दयनीय है | भारत में अगर न्यूनतम मजदूरी की बात की जाए तो यहां न्यूनतम मजदूरी की दर अलग- अलग प्रदेशों में अलग अलग है । मनरेगा योजना के तहत यूपीए सरकार ने मजदूरों को सौ रुपए प्रतिदिन के हिसाब से सौ दिन के काम का प्रावधान रखा है | 2014 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार सभी राज्यों को न्यूनतम तय मजदूरी देने का निर्देश दिया गया था और तब तत्कालीन केंद्र सरकार ने 119 रुपए देना तय किया था | मनरेगा में न्यूनतम मजदूरी की दर 156 से 236 रुपए है | दुनिया के अन्य देशों की तुलना में भारत की न्यूनतम मजदूरी की दरबहुत कम है | संविधान बनने से पूर्व भारत में न्यूनतम मजदूरी अधिनियम 1948 लागू किया गया था जिसमें अभी भी कोई सुधार नहीं हुआ हैं | इस अधिनियम के तहत भी हर राज्य की न्यूनतम मजदूरी की दर अलग-अलग है | बरहाल भारत में मजदूरों की दशा विचारनीय है  और  देश के मजदूरों को एक संगठित दिशा देने के लिए सरकार प्रयासरत है |  उल्लेखनीय है कि सरकार भारतीय मजदूरों के लिए कई योजनायें बना रही  है जिनमें से 2020 तक सभी को रहने के लिए आवास उपलब्ध करना अहम् है जो इन मजदूरों की ज़िन्दगी  बदलने में सहायक साबित हो सकती है | बरहाल अगर प्रवासी मजदूरों की बात की जाए तो उनकी दशा बहुत दयनीय है, उनकी  आर्थिक और सामाजिक स्थिति विचारनीय है | खाड़ी देशों में काम करने वाले भारतीय मजदूर की स्थिति बहुत खराब है | लगभग 7 करोड़ से अधिक भारतीय सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत, ओमान, कतर और बहरीन के तेल समृद्ध खाड़ी देशों में काम करते हैं | इंडिया स्पीड द्वारा किये गये सर्वेक्षण से ये बात सामने आयी कि सऊदी अरब या कुवैत में रहने वाले भारतीय मजदूरों की ज़िन्दगी पर हमेशा मौत का खतरा बना रहता है | खूबसूरत दुबई में छुपी इन प्रवासी मजदूरों की स्थिति भी बहुत गंभीर है | सुनहरे भविष्य का सपना लिए जब भारतीय मजदूर इन खाड़ी देशों में कदम रखता है तो उन्हें पता नहीं होता कि उनके सुनहरे भविष्य का सपना चुनौतियों भरा है | सयुंक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार वहां कार्यरत मजदूरों के पासपोर्ट जब्त कर लिया जाता है और भीषण गर्मी में उन्हें बहुत लंबे समय तक काम करने के लिए मजबूर किया जाता हैं |  लगभग 50 डिग्री की भीषण तापमान में प्रवासी मजदूर आमतौर पर 14 घंटे काम करते हैं  | इसके विपरीत, पश्चिमी देशों के पर्यटकों को गर्मियों में पांच मिनट के लिए भी बाहर न जाने की सलाह दी जाती है |  हालांकि सरकार के नियमों के अनुसार तापमान अधिक होने पर काम बंद करने का प्रावधान है ताकि किसी को स्वास्थ्य की कोई तकलीफ ना हो, लेकिन ऐसे नियम होने के बावजूद ये प्रवासी मजदूर भीषण गर्मी में काम करते है |  संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार लगभग  35 लाख भारतीय प्रवासी इन खाड़ी देशों में रहते है और  उनमें से आधे से अधिक महिलाएं हैं |  इनमे ज्यादातर महिलाएं कम कुशल और अविवाहित है | संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट साफ़ करती है कि ये महिलाएं घरेलू कामगारों का काम करती है जिन्हें  अल्प मजदूरी, भुगतान न मिलना सहित शारीरिक, यौन और भावनात्मक शोषण का सामना करना पड़ता है | हालांकि भारतीय महिलाओं के अधिकारों का अन्य देश में हनन ना हो इसके लिए भारत में विशेष दिशा निर्देश है और इन वर्ग के लोगों को विदेश में मजदूरी करने से पहले उन्हें समझना आवश्यक है | भारतीय मजदूरों एवं कामगारों को विदेश में मजदूरी करने से पहले सरकार की इन योजनाओं के प्रति जागरूक होना बहुत जरूरी है ताकि उनके अधिकारों का हनन ना हो | 

विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (एसटीईएम) क्षेत्रों में महिलाओं का वर्चस्व

 https://pratipakshsamvad.com/women-dominate-the-science-technology-engineering-and-mathematics-stem-areas/  (अन्तराष्ट्रीय महिला दिवस)  डॉ ...